अब तो जाग
कौन बुझाए खुद के भीतर , रहो जलाते आग,
ऐसे नहीं मिटा पायेगा, कोई आपका दाग.
मन की बातें कभी न करते, भीतर रखते नाग,
कैसे बतियाएं हम तुमसे, करते भागमभाग.
कहे चोर को चोरी कर ले, मालिक को कह जाग,
इज्जत सबकी एक सी होती, रहने दो सिर पाग.
धूम मचाले रंग लगा ले, आया है अब फाग,
बेसुर की तूं बात छोड़ दे, गा ले मीठा राग.
मन के अंधियारे को मेटो , क्यों बन बैठे काग,
कब तक सोये रहोगे साथी, उठ रे अब तो जाग. Published On: 2011-09-13 12:09:18