Thursday, 23 February, 2012 05:17:15 AM  
विकास कार्यों को निर्धारित समयावधि के भीतर पूरा किया जाए:उपायुक्त , संत निरंकारी सेवादल द्वारा बादशाह खान अस्पताल में सफाई अभियान चला,
Editorial
शाहरूख ने खोया मानसिक संतुलन
फिल्म फेयर अवॉड्र्स के मौके पर तो शाहरुख फूहड़ता की इस हद‌ तक गिर गए कि माधुरी के साथ ठुमके लगाने के लिए औरतों के कपड़े पहन कर मंच पर उतर आए
Published On: 2012-02-03 04:26:18

डांस ऑफ डेमोक्रेसी
क्या वाकई अन्ना का आंदोलन एक खास वर्ग से संबद्ध था। नहीं। देश के मन में भ्रष्टाचार को लेकर जो भड़ास थी वह अन्ना के माध्यम से बाहर निकली और पूरे देश में छा गई। हर आदमी को अन्ना के रूप में अपनी खुद की अंतरात्मा दिखाई दी। अन्ना के रूप में देश को एक ऐसा नायक मिला जिसे देखकर उसे लगा कि यह उसके जैसा है।
Published On: 2011-10-14 11:37:50

ऑयल महंगा हो गया अब तो धक्का मार...
आजा मेरी गाड़ी में बैठजा... टाइप का गाना गाने वाले छोरों पर अब्बाओं की निगाहें टिकी हैं।
Published On: 2011-08-01 12:40:03

आजादी बोले तो
वोट के अधिकार से लेकर सूचना के अधिकार तक ने हमारी आजादी में चार चांद लगा दिए हैं ।
Published On: 2011-07-16 12:50:37

सीएसआर या कंपनी सरकार
भ्रष्ट अफसर और भ्रष्ट नेता के मुकाबले भ्रष्ट व्यापारी जनता के लिए ज्यादा फायदेमंद है।
Published On: 2011-06-13 05:18:43

बेगानी शादी में मीडिया दीवाना
देश में भ्रष्टाचार को लीगलाइज कीजिए बड़े फायदे होंगे साहब।
Published On: 2011-05-17 11:41:40

सबै भूमि गोपाल (माफिया) की
200-400 भ्रष्टाचारियों को फांसी दे दीजिए हिंदुस्तान सुधर जाएगा।
Published On: 2011-03-18 12:19:59

फिर भी छलक रहा है जाम
कई सौ करोड़ रुपये ऐसे पुलों में फुंकने के बावजूद जाम का छलकना जारी हो तो कोफ्त होनी लाजमी है। पब्लिक ऐसे पुल बनाने वालों को पानी पी-पीकर कोसती है। आखिर क्या वजह है कि शाम को कोई योजना पूरी हुई और अगले दिन सुबह वह छोटी पडऩे लगती है।
Published On: 2011-02-23 10:23:29

हर नोट पर बापू बैठा है, अंजामे हिंदुस्तां क्या होगा...
हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्ता΄ क्या होगा। पंक्तियों को पढ़ते हुए ही बड़े हुए है΄। भ्रष्टाचार के सूरते हाल को व्यक्त करने में ये पंक्तियों खासी मुफीद है΄। अपराध के प्रति लगातार बरती जा रही अनदेखी ने उत्सव शर्मा जैसी मानसिक विक्षप्ताओं को जन्म दिया हैले राठौर और अब डॉ. तलवार पर उसके हमले सुरक्षा की दृष्टि से नहीं, समाज की दृष्टि से ज्यादा चिंताजनक है΄।
Published On: 2011-02-16 02:33:45

ठीक है यंग इज बोल्ड, लेकिन ओल्ड भी है गोल्ड
ओबामा के दिल्ली दरबार आगमन से लेकर बिहार के चुनाव तक पूरा देश यंगिस्तानका राग अलाप रहा है। मीडिया हो या फिर पॉलिटिक्स, यूथ पावर का दखल हर ओर दिखाई दे रहा है। ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में जब देशों की सीमाएं धुंधली हो रहीहों और युवाओं को बिना विचार के सिर्फ भोगवादी दर्शन की ओर मीडिया धकेल रहाहो ऐसे में युवा मंत्र का जाप बाजार को सबसे ज्यादा रास आ रहा है।
Published On: 2011-02-16 01:49:13

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